true

12

वर्ष

हमारे बारे मे

12 वर्षों का सामाजिक सफर..

श्रमिक उत्थान एवम् सामाजिक कल्याणकारी आसोशिएशन के लक्ष्य की पूर्ति हेतु निर्मित राजनीतिक पार्टी/पक्ष/दल। समाज में श्रमिकों, किसानों व आर्थिक कमजोर मध्यम वर्ग की अनदेखी तथा जाति, धर्म, नस्ल, वर्ग को लेकर फैलता भेद-भाव एवं वैमनस्यता की राजनीति आदि समाप्त करने हेतु....

  • पार्टी उद्‍गम से पूर्व के कार्य...
  • 2014 मनमोहन सरकार के कार्यकाल के दौरान गैस सिलेंडरों..
  • कोरोनाकाल में मनरेगा/श्रमिक ट्रेन / आपदा प्रबंधन समिति पर जोर..
विस्तार से पढ़ें

हमें सहियोग करें..

देश के आमजन के उद्देश्यों व उनके मौलिक अधिकारों (मूलभूत अधिकार) की पुर्ति हेतु संकल्पित पक्ष "अखिल भारतीय श्रमिक पार्टी" एक ऐसी पार्टी/पक्ष है जो देश के सभी 95% आमजनों के लिये दृणसंकल्पित है, न कि 5% पूँजीपतियों के उद्देश्यों की पूर्ति के लिये जो आपका शोषण करते हैं, जो अपने उद्देश्य पूर्ति के लिये कुछ ऐसी राजनीतिक पार्टियों को मोटी रक्कम फंड के नाम से देकर सौदा करते हैं कि सत्ता में आने के बाद वो उन्हे बड़े-बड़े प्रोजेक्ट/टेण्डर के नाम से व बड़े-बड़े लोन को मांफ करने के नाम से फंड को दस गुना लाभ के जरिये वापस करेंगे, और ये राजनीतिक पार्टियाँ इन पैसों का इस्तेमाल बड़े‌-बड़े इवेंट, रैलियों, जनसभा आदि व कार्यक्रमों में भीड़ इकठ्ठा करने के लिये गरीब लोगों को 200 से 500 रूपये तक का लालच देकर भीड़ जमा करते हैं, और अपने पक्ष में नारेबाजी करवाते हैं, जिनके माध्यम से ये पार्टियाँ माहौल को अपने पक्ष में बनाते हैं, ये गरीब श्रमिक, किसानों की मजबूरियों का लाभ अपने हित-लाभ / सत्ता पर आसीन होने के लिये उठाते हैं और बकौल आम जनता इनके झांसे में आ जाती है, वो गरीब ये नहीं जानते हैं कि उनके द्वारा लिये गये चंद रूपयो का खामियाजा पूरा देश झेलता है इतना ही नहीं ये जाति-धर्म, मजहब, नस्ल, वर्ग का भेद-भाव और डर दिखा कर नफरत की भावना व वैमनस्यता फैलाते हैं, ऐसे राजनीतिक दल चुने तो जनता के द्वारा जाते हैं लेकिन लाभ उन पूँजीपतियों को पहुँचाते है, जो इन्हे फंड के नाम पर मोटी रकम थमाते हैं। ये राजनीतिक पार्टियाँ श्रमिकों/किसानों गरीब मध्यम वर्ग बेरोजगार युवाऑ के हित को ताख में रख अपने हित-लाभ के खातिर कागजों पर कार्य करके अपने हित-चिंतको को ही सिर्फ लाभ पहुँचाते हैं जो इनका रात दिन गुनगान गाते हैं, जिनमे देश के बिके हुए मीडिया हाऊस भी शुमार हैं, उनमे इनकी चाटुकारिता करने वाले एंकर जो सालाना करोड़ों का पैकेज उठाते हैं, वहीं सच्च की आवाज उठाने वाले पत्रकार जेल में ठूँसे जाते हैं या अपनी जांन गवांते हैं और वहीं वो फटेहाल नजर आते हैं, ये अपने पत्रकार साथियों के लिये सुरक्षा कानून बनाने के लिये भी कभी सरकार पर दबाव नहीं बनाते, इतना ही नहीं देश की आजादी से लेकर संविधान निर्माण करने वाली वकीलों की कम्युनिटी के लिये भी सुरक्षा के कोई पुख्ता कानून बनाने के लिये सरकार पर दबाव नहीं बनाते हैं ना ही वकिलों के पक्ष में कभी खड़े नज़र आते है, न ही जनता के पक्ष में कोई मुहिम चलाते है, यदि कोई अवाज उठाते भी हैं तो देर रात में कुछ क्लिप चलाने के बाद सरकार की तारीफ में पूरा दिन तारीफ़ करते नजर आते हैं, उधर सरकार भी सिर्फ जुमलेबाज़ी से ही लोगों को लुभाती है। क्योंकि अब देश में जनता की फिक्र करने वाले 'नेता' नहीं सिर्फ 'राजनेता' बचे हैं जो सिर्फ एन-केन-प्रकारेण सत्ता लुलोभी हैं, उनका तो मानना है जनता 'मरे तो मरे' हमें तो सत्ता चाहिये...! साथियों अब वक्त आ गया है कि हमे एक बार फिर ऐसे आतितायियों के खिलाफ आवाज बुलंद करनी होगी....जिसके लिये हम सभी को एकत्र हो कर लड़ना पड़ेगा... जिसमें आप सभी का योगदान/सहियोग आपेक्षित है... आप सभी से अनुरोध है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में जुड़ें व अपने लोगों को जोड़ें, तथा आर्थिक सहियोग में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लें ताकि सत्ता लुलोभी पूँजीपतियों के दलालों से लड़ने में मद्‍द मिले। आपका योगदान शहीदों के बलिदान को इनके हाथों मिटने से बचाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। जय हिंद...

स्वयं सेवक बनें

हमारा वादा / घोषणा पत्र

हम किसके लिए खड़े हैं

true

आपका आभार

राम प्रकाश निषाद

प्रिय साथियों,

“श्रमिक उत्थान एवं सामाजिक कल्याणकारी एसोसिएशन” द्वारा किए गए उल्लेखनीय सामाजिक एवं जनकल्याणकारी कार्यों को देखते हुए यह केवल आशा ही नहीं, बल्कि पूर्ण विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि इसके उद्गम से निर्मित राजनीतिक संगठन भी देशहित, जनहित तथा श्रमिकों, किसानों और आमजन के हितों की रक्षा एवं उन्नति हेतु एक नई और सकारात्मक व्यवस्था स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मैं देश के सभी श्रमिकों, किसानों, कर्मचारियों, युवाओं एवं जागरूक नागरिकों से विनम्र आग्रह करता हूँ कि वे एकजुट होकर इस जनआंदोलन में बढ़-चढ़कर भागीदारी करें। अपने समय, श्रम, विचार एवं सामर्थ्य के अनुसार सहयोग प्रदान करें, स्वयंसेवक के रूप में जुड़ें तथा सदस्यता ग्रहण कर संगठन को मजबूत बनाने में योगदान दें।

संगठन जितना अधिक सशक्त होगा, उतनी ही प्रभावी ढंग से वह समाज के वंचित, श्रमजीवी और सामान्य नागरिकों की आवाज़ को बुलंद कर सकेगा। एक मजबूत संगठन ही जनहित के मुद्दों को प्रभावी रूप से उठाकर सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

आइए, हम सब मिलकर एक ऐसे भारत के निर्माण में योगदान दें जहाँ श्रम का सम्मान हो, किसान समृद्ध हो, युवा सशक्त हो और प्रत्येक नागरिक को समान अवसर एवं सम्मान प्राप्त हो।

आपके सहयोग, विश्वास एवं सहभागिता के लिए हृदय से धन्यवाद।

आपका आभारी।

धन्यवाद।

अखिल भारतीय श्रमिक पार्टी (ABSP)

राम प्रकाश निषाद   -   कार्यकारणी सदस्य
अ‍जय कुमार

भाइयों एवं बहनों, नमस्कार।

मैंने “श्रमिक उत्थान एवं सामाजिक कल्याणकारी एसोसिएशन” के उल्लेखनीय कार्यों को केवल देखा ही नहीं है, बल्कि स्वयं तथा हमारे जैसे अनेक गरीब श्रमिक परिवारों और घरों में कार्य करने वाली महिलाओं ने इसका प्रत्यक्ष लाभ भी प्राप्त किया है।

आपमें से कुछ लोग यह प्रश्न कर सकते हैं कि संस्था ने आखिर हमारे लिए ऐसा क्या किया है?

मैं अपने अनुभव के आधार पर बताना चाहता हूँ कि हम सभी एक बिल्डर समूह द्वारा की गई ठगी के शिकार हुए थे। उस समय हमारी स्थिति अत्यंत कठिन थी। न तो हमारी पुलिस द्वारा शिकायत दर्ज की जा रही थी और न ही दोषियों के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई होती दिखाई दे रही थी।

ऐसे समय में श्रमिक उत्थान एवं सामाजिक कल्याणकारी एसोसिएशन हमारे साथ खड़ी हुई। संस्था के प्रयासों से हमारी शिकायत दर्ज कराई गई और लगातार कानूनी एवं सामाजिक सहयोग के माध्यम से दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित कराई गई। परिणामस्वरूप संबंधित लोगों को जेल भी जाना पड़ा और पीड़ितों को न्याय की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला।

इन्हीं अनुभवों के आधार पर हम पूर्ण विश्वास के साथ कह सकते हैं कि इस संगठन के उद्गम से जन्मी राजनीतिक पार्टी भी देशहित, जनहित तथा श्रमिकों, किसानों, कर्मचारियों और आम नागरिकों के अधिकारों एवं हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मैं देश के सभी श्रमिकों, किसानों, युवाओं, कर्मचारियों एवं जागरूक नागरिकों से विनम्र आग्रह करता हूँ कि वे एकजुट होकर इस अभियान में भाग लें, संगठन को मजबूत बनाने में अपना योगदान दें, स्वयंसेवक के रूप में जुड़ें तथा सदस्यता ग्रहण करें।

संगठन जितना अधिक मजबूत होगा, उतनी ही प्रभावी ढंग से वह आमजन, श्रमिकों और किसानों की आवाज़ को शासन-प्रशासन तक पहुँचाने में सक्षम होगा।

आइए, हम सब मिलकर एक न्यायपूर्ण, श्रमसम्मानित और जनहितकारी व्यवस्था के निर्माण में अपना योगदान दें।

धन्यवाद।

अशोक विश्वकर्मा   -   कार्यकारणी सदस्य
त्रिभुवन यादव

साथियों, नमस्कार।

आज मैं आप सभी के समक्ष “श्रमिक उत्थान एवं सामाजिक कल्याणकारी एसोसिएशन” के एक ऐसे उल्लेखनीय योगदान का उल्लेख करना चाहता हूँ, जिसे जानकर आप आश्चर्यचकित हो सकते हैं। इसका लाभ केवल मैंने ही नहीं, बल्कि आपमें से अनेक लोगों ने भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त किया है। फिर भी अधिकांश लोग आज तक इसे केंद्र सरकार की एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में ही जानते हैं। जबकि मेरे विचार में इस महत्वपूर्ण पहल का श्रेय संस्था के अध्यक्ष श्री रवि जी. निगम को जाता है।

अब आप यह जानने के लिए उत्सुक होंगे कि आखिर वह कौन-सा योगदान था।

कोरोना काल की अभूतपूर्व चुनौती

कोरोना महामारी के दौरान जब अचानक देशव्यापी लॉकडाउन लागू किया गया, तब सरकार के सामने एक अभूतपूर्व चुनौती खड़ी हो गई थी। देश के विभिन्न भागों में लाखों प्रवासी मजदूर, कर्मचारी, विद्यार्थी और आम नागरिक अपने घरों से दूर फँस गए थे।

उस समय देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने देशवासियों से अपील की थी कि वे जहाँ हैं वहीं रहें, सुरक्षित रहें और राशन अथवा आवश्यक वस्तुओं की चिंता न करें, क्योंकि देश के पास पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। यह बात सभी को स्मरण होगी।

बढ़ती हुई मानवीय समस्या

किन्तु जैसे-जैसे समय बीतता गया, परिस्थितियाँ लगातार गंभीर होती चली गईं। लोग अपने परिवारों के पास लौटना चाहते थे और उनके परिजन भी उनकी सुरक्षा को लेकर अत्यंत चिंतित थे।

सरकार परिवहन सेवाएँ प्रारंभ करने को लेकर सतर्क थी, क्योंकि उसे आशंका थी कि यदि ट्रेनें और बसें शुरू कर दी गईं तो भारी भीड़ एकत्र हो सकती है, जिससे महामारी की स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। परिणामस्वरूप लोगों को यथास्थान रोकने का प्रयास किया गया।

दूसरी ओर, प्रवासी मजदूरों और आम नागरिकों की बेचैनी लगातार बढ़ती जा रही थी। अनेक स्थानों पर भोजन और आवश्यक संसाधनों की कमी महसूस होने लगी। ऐसे कठिन समय में स्वयंसेवी संस्थाएँ और सामाजिक संगठन लोगों की सहायता के लिए आगे आए। अंततः अनेक लोग पैदल ही अपने घरों की ओर निकल पड़े। प्रारंभिक घटनाएँ गुजरात में देखने को मिलीं और बाद में मुंबई के बांद्रा क्षेत्र की घटना ने पूरे देश का ध्यान इस संकट की ओर आकर्षित किया।

संकट की पूर्व चेतावनी

मेरे अनुसार, श्री रवि जी. निगम ने लॉकडाउन लागू होने के लगभग पाँच दिनों के भीतर ही इस संभावित संकट का अनुमान लगा लिया था।

संस्था के समाचार पोर्टल में प्रकाशित संपादकीय लेखों के माध्यम से उन्होंने यह चेतावनी दी थी कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो प्रवासी मजदूरों और आम नागरिकों के बीच व्यापक असंतोष तथा बड़े पैमाने पर पलायन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

दुर्भाग्यवश उस समय इन चेतावनियों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।

14 अप्रैल 2020 का महत्वपूर्ण सुझाव

इसके पश्चात 14 अप्रैल 2020 को श्री रवि जी. निगम ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, गृह मंत्री श्री अमित शाह जी, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तथा प्रमुख विपक्षी नेताओं को ईमेल के माध्यम से एक विस्तृत एसओपी (Standard Operating Procedure) भेजी।

इस प्रस्ताव में प्रमुख रूप से निम्न सुझाव सम्मिलित थे—

  • प्रवासी मजदूरों के लिए विशेष ट्रेनों की व्यवस्था।
  • मनरेगा के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने की योजना।
  • संकट प्रबंधन हेतु समन्वित राष्ट्रीय कार्ययोजना।

उल्लेखनीय है कि इसी दिन बांद्रा की चर्चित घटना भी सामने आई थी।

श्रमिक स्पेशल ट्रेनों की शुरुआत

अगले ही दिन, 15 अप्रैल से मनरेगा से संबंधित सकारात्मक संकेत दिखाई देने लगे और बाद में प्रवासी मजदूरों के लिए विशेष ट्रेनों को प्रारंभ करने की घोषणाएँ सामने आईं।

आने वाले महीनों में इन्हीं सेवाओं को “श्रमिक स्पेशल ट्रेन” के नाम से प्रारंभ किया गया, जिनके माध्यम से लाखों प्रवासी मजदूरों और नागरिकों को उनके गृह राज्यों तक पहुँचाया गया।

आपदा प्रबंधन समिति का प्रस्ताव

उस समय महामारी प्रबंधन का अधिकांश नियंत्रण प्रधानमंत्री और गृह मंत्री स्तर पर केंद्रित था।

श्री रवि जी. निगम ने एक समर्पित “आपदा प्रबंधन समिति” के गठन का सुझाव दिया। उनका मत था कि इस समिति में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, पेशेवरों और गैर-राजनीतिक व्यक्तियों को सम्मिलित किया जाए, ताकि राहत कार्यों और नीतियों को अधिक प्रभावी, संतुलित और जवाबदेह बनाया जा सके।

इस विषय में सर्वोच्च न्यायालय को भी पत्र लिखे जाने का उल्लेख किया गया। बाद में आपदा प्रबंधन की व्यवस्थाएँ अधिक संगठित रूप में विकसित हुईं, यद्यपि उनका संचालन मुख्यतः सत्ताधारी तंत्र के हाथों में ही बना रहा।

पर्दे के पीछे किया गया कार्य

ये ऐसे प्रयासों के उदाहरण हैं जो पर्दे के पीछे रहकर किए गए और जिन्हें सार्वजनिक स्तर पर बहुत कम पहचान मिली।

बाद में “श्रमिक स्पेशल ट्रेन” सेवाएँ प्रारंभ हुईं और राजनीतिक स्तर पर उनका व्यापक प्रचार भी हुआ। किन्तु मेरे विचार में उन सुझावों और प्रयासों का समुचित उल्लेख कभी नहीं किया गया, जिन्होंने इस दिशा में सोच और समाधान प्रस्तुत करने का कार्य किया था।

इतिहास में उचित स्थान का प्रश्न

मेरा मानना है कि जिन सुझावों और प्रयासों ने देश के भीतर ही नहीं, बल्कि विदेशों में फँसे नागरिकों की वापसी के लिए भी मार्ग प्रशस्त करने में योगदान दिया, उन्हें इतिहास में उनका उचित स्थान मिलना चाहिए।

यदि समय रहते ऐसे कदम न उठाए जाते, तो मानवीय संकट कहीं अधिक गहरा हो सकता था और आर्थिक स्थिति भी कहीं अधिक गंभीर रूप धारण कर सकती थी। उस समय देश की जीडीपी पहले से ही अभूतपूर्व गिरावट का सामना कर रही थी और परिस्थितियाँ और अधिक चुनौतीपूर्ण बन सकती थीं।

राजनीति और जनहित में अंतर

साथियों, यही वह अंतर है जो केवल राजनीति करने और वास्तविक जनहित में कार्य करने के बीच दिखाई देता है।

यदि कोई सामाजिक कार्यकर्ता और सामाजिक संस्था बिना किसी सरकारी पद, राजनीतिक शक्ति अथवा प्रशासनिक अधिकार के भी सार्थक सुझाव और समाधान प्रस्तुत कर सकती है, तो कल्पना कीजिए कि जनसमर्थन और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व मिलने पर वह समाज के लिए कितना बड़ा परिवर्तन ला सकती है।

हमारा आह्वान

इसी विश्वास के साथ मैं देश के सभी श्रमिक भाइयों, किसान भाइयों, कर्मचारियों, युवाओं और जागरूक नागरिकों से आग्रह करता हूँ कि वे एकजुट होकर इस अभियान से जुड़ें।

  • संगठन को मजबूत बनाएं।
  • स्वयंसेवक बनें।
  • सदस्यता ग्रहण करें।
  • अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग प्रदान करें।

हमारा संकल्प

आइए, हम सब मिलकर ऐसी व्यवस्था के निर्माण में योगदान दें जहाँ श्रम का सम्मान हो, न्याय सुलभ हो, अवसर समान हों और जनहित सर्वोच्च प्राथमिकता हो।

धन्यवाद।

अखिल भारतीय श्रमिक पार्टी (ABSP)

श्रमिकों, किसानों और आमजन के अधिकारों के लिए समर्पित।

त्रिभुवन यादव   -   कार्यकारणी सदस्य
true
हमारी जनसेवक टीम

जनसेवक

एड. रवि जी. निगम

राष्ट्रीय अध्यक्ष

प्रिय देशवासियों, "अखिल भारतीय श्रमिक पार्टी" का मूल संकल्प संगठित और असंगठित श्रमिकों के बीच की असमानता को समाप्त कर प्रत्येक श्रमिक को समान अधिकार, सुरक्षा, सम्मान और अवसर प्रदान करना है। हम किसानों की समृद्धि, युवाओं के लिए योग्यता आधारित रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुलभ चिकित्सा तथा आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध हैं। महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और राजनीति में न्यूनतम 33% सहभागिता सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है। आइए, मिलकर एक न्यायपूर्ण, समृद्ध, सशक्त और अखंड भारत का निर्माण करें। – राष्ट्रीय अध्यक्ष (अखिल भारतीय श्रमिक पार्टी)

Public Administration 98%
Human Rights 89%
true
true
From The News & Articles

जन संदेश

true
true